आत्म-स्मृति: चित्त के प्रतिरूपों से ब्रह्म-विलयन का एक अपरोक्ष विवेचन

आत्म-स्मृति: चित्त के प्रतिरूपों से ब्रह्म-विलयन का एक अपरोक्ष विवेचन

आत्म-स्मृति: चित्त के प्रतिरूपों से ब्रह्म-विलयन का एक अपरोक्ष विवेचन अद्वैत वेदांत और ज्ञान मार्ग की पूरी साधना का सार केवल एक शब्द में सिमटा है—स्मृति। संसार का अर्थ है ‘विस्मृति’ (भूल जाना) और मोक्ष का अर्थ है ‘स्मृति’ (याद आ जाना)। हम...
ज्ञानमार्ग: ज्ञान का सीधा मार्ग – मार्गहीन मार्ग

ज्ञानमार्ग: ज्ञान का सीधा मार्ग – मार्गहीन मार्ग

ज्ञानमार्ग ज्ञानमार्ग इच्छापूर्ति का मार्ग नहीं है।कभी-कभी जीवन में उसका प्रभाव सकारात्मक दिख सकता है, कुछ शुद्धिकरण भी होता है, पर यह उसका उद्देश्य नहीं।ज्ञानमार्ग का लक्ष्य है — अज्ञान का नाश, और उस नाश के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली शांति, मुक्ति और आनंद की...

मूलज्ञान मूलज्ञान यह कहता है कि अस्तित्व स्वयं को ही अपने मिथ्या रूपों के रूप में अनुभव कर रहा है।अस्तित्व ही दृश्य है और अस्तित्व ही द्रष्टा है।जो प्रकट है वही उसका साक्षी भी है।स्वप्रद्रष्टा ही स्वप्र भी है। यही मूलज्ञान है — इससे आगे कोई ज्ञान नहीं है।जब दृश्य और...
प्रश्न ५: अस्तित्व का तत्त्व क्या है?

प्रश्न ५: अस्तित्व का तत्त्व क्या है?

⭐ मनन–उत्तर (प्रश्न ५): अस्तित्व का तत्त्व क्या है? परिभाषा अस्तित्व का तत्त्व अनुभवकर्ता है। जो कुछ भी प्रकट है → अनुभव है।जिसे यह प्रकट हो रहा है → वही अनुभवकर्ता है। अनुभव बदलता है;अनुभवकर्ता नहीं बदलता। अपरिवर्तनशील जो है — वही तत्त्व है। विस्तार १. तत्त्व वह है...

प्रश्न ४: अज्ञेयता का क्या उपयोग है?

⭐ मनन–उत्तर (प्रश्न ४) परिभाषा अज्ञेयता वह है जिसे जाना नहीं जा सकता।जो कुछ भी जाना जाए — वह अनुभव है, और इसलिए परिवर्तनशील।परिवर्तनशील ज्ञेय है;अपरिवर्तनशील अज्ञेय। सत्य और तत्त्व — दोनों अज्ञेय हैं, क्योंकि उनका कोई अनुभव नहीं हो सकता। विस्तार १. अज्ञेयता बुद्धि को...

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