चेतना और चैतन्य: गुरु आदिसत्व जी का आज का दैनिक सत्संग

चेतना और चैतन्य: गुरु आदिसत्व जी का आज का दैनिक सत्संग

चेतना और चैतन्य — एक आध्यात्मिक व्याख्या गुरु आदिसत्व जी की वाणी से प्रस्तावना आज का विषय है — चेतना और चैतन्य।इन दोनों शब्दों का प्रयोग सभी आध्यात्मिक मार्गों में होता है,लेकिन हर मार्ग अपनी अनुभूति के आधार पर इनकी अलग व्याख्या देता है। साधारण संसार में चेतना का अर्थ...
साक्षी या साक्षीभाव? ज्ञानमार्ग का गहन रहस्य

साक्षी या साक्षीभाव? ज्ञानमार्ग का गहन रहस्य

साक्षीभाव और साक्षी — सूक्ष्म भेद का गहन विवेचन (ज्ञानमार्ग की दृष्टि से आज की चर्चा का सार) ज्ञानमार्ग में अनेक बार साधक दो वाक्य बोलता है— “मैं साक्षीभाव में हूँ।” “साक्षी है।” पहली दृष्टि में दोनों समान प्रतीत होते हैं, परंतु आज की चर्चा में स्पष्ट हुआ कि दोनों...
कुंडलिनी ऊर्जा — मिथ्याएँ, वास्तविकता और साधक की आंतरिक यात्रा

कुंडलिनी ऊर्जा — मिथ्याएँ, वास्तविकता और साधक की आंतरिक यात्रा

कुंडलिनी ऊर्जा की वास्तविक यात्रा — आदिसत्व जी का चिंतन प्रस्तावना कुंडलिनी शब्द सुनते ही मन में रहस्यमयी शक्ति, अचानक उठने वाली ऊर्जा, चमत्कारिक अनुभव और कई तरह की कहानियाँ उभर आती हैं। परंतु सच्चाई इन सब से बहुत सरल, बहुत शांत और बहुत स्वाभाविक है। निर्वाण धाम की...
ज्ञानमार्ग: अद्वैत वेदांत की सरल और स्पष्ट व्याख्या

ज्ञानमार्ग: अद्वैत वेदांत की सरल और स्पष्ट व्याख्या

ज्ञानमार्ग (अद्वैत वेदांत की सामूहिक दृष्टि से एक स्पष्ट व्याख्या) प्रस्तावना ज्ञानमार्ग कोई साधना-पद्धति नहीं, बल्कि भीतर घटती हुई पहचान का धीरे-धीरे विलीन होना है। यह यात्रा अनुभवों से नहीं, बल्कि अनुभवों के आधार की पहचान से चलती है। अद्वैत वेदांत कहता है कि सभी...
मैं हूँ: ब्रह्म या भ्रम? | अद्वैत वेदांत की सरल व्याख्या

मैं हूँ: ब्रह्म या भ्रम? | अद्वैत वेदांत की सरल व्याख्या

“मैं हूँ”: ब्रह्म या भ्रम? एक सीधा उत्तर, अद्वैत वेदांत की दृष्टि से “इस विषय पर हमारा विस्तृत मार्गदर्शन दिए गए वीडियो में देख सकते हैं।” जब साधक भीतर की यात्रा पर निकलता है, एक दिन अचानक यह प्रश्न उसके सामने खड़ा होता है: “जो ‘मैं’ अभी अनुभव हो रहा है…क्या वही...

Pin It on Pinterest