गुरु ज्ञान

गुरु ज्ञान केवल शब्दों का संवाद नहीं, बल्कि चेतना का स्पर्श है

यह जिज्ञासु और आदिगुरु-तत्त्व के बीच एक विधिवत और आंतरिक संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया है। यह कोई साधारण पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि तीन दिनों (त्रि-दिवसीय) तक चलने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जो अपॉइंटमेंट (समय-निर्धारण) के आधार पर, साधक की पात्रता और गंभीरता को देख कर ही संपन्न किया जाता है।

त्रि-दिवसीय प्रक्रिया

समीक्षा

प्रथम दिवस

यात्रा आरम्भ करने से पूर्व धरातल का स्पष्ट होना आवश्यक है। इस चरण में साधक की वर्तमान स्थिति, उसकी जिज्ञासा की तीव्रता और जीवन में अध्यात्म की आवश्यकता पर स्पष्टता लाई जाती है। यह तैयारी का चरण है।

दीक्षा

द्वितीय दिवस

यह प्रक्रिया का मध्य भाग है, जहाँ साधक को 'निर्वाण ध्यान' के माध्यम से मानसिक शांति और स्थिरता का अनुभव कराया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य साधक का आदिगुरु-तत्त्व के साथ एक सहज आंतरिक संबंध स्थापित करना है। इस दौरान साधक की रूचि और पात्रता के अनुसार उसे आगे की साधना हेतु मार्गदर्शन या मंत्र प्रदान किया जाता है।

निर्वाण पथ

तृतीय दिवस

दीक्षा के उपरांत, साधक को अपने अनुभवों को देखने (अवलोकन) की दृष्टि दी जाती है। यहाँ से औपचारिक संवाद और वास्तविक साधना का वह सफर शुरू होता है, जो अंततः सत्य तक ले जाता है।

जिज्ञासा और निर्देश

स्थान की कोई बाधा नहीं: ऑनलाइन दीक्षा प्रक्रिया

गुरु ज्ञान की यह प्रक्रिया वर्तमान में पूर्णतः ऑनलाइन दृश्य-संवाद (वीडियो कॉल) के माध्यम से संपन्न की जाती है।

ऊर्जा और चेतना के प्रवाह हेतु भौतिक दूरी कोई बाधा नहीं है। हम आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए एक 'आभासी सेतु' का निर्माण करते हैं, जिससे आप अपने निवास स्थान पर रहते हुए ही इस त्रि-दिवसीय प्रक्रिया और आदिगुरु-तत्त्व से जुड़ सकें।

ये सत्र सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से आयोजित किए जा सकते हैं। आपके पास केवल एक एकांत स्थान और उत्तम नेटवर्क सुविधा का होना आवश्यक है।

आवेदन प्रपत्र

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