पुस्तक के बारे में
माया सिर्फ एक दार्शनिक विचार नहीं — यह वह पर्दा है जो हम अपने ही स्वरूप पर डाले हुए हैं। इस पुस्तक में आदिसत्व विचार की प्रकृति, मन के भ्रम और उस जागृति को उजागर करते हैं जो हमेशा से यहाँ है। माया को समझना ही मुक्ति की पहली किरण है।
