पुस्तक के बारे में
तंत्र को संकीर्ण रहस्यवाद से मुक्त कर आगम, निगम, कुलमार्ग और अद्वैत की जीवित धारा के रूप में देखने वाली पुस्तक। यह साधक को मार्गों के भेद से आगे उनके एक ही सत्य-स्रोत की ओर ले जाती है।
पुस्तक के बारे में
तंत्र को संकीर्ण रहस्यवाद से मुक्त कर आगम, निगम, कुलमार्ग और अद्वैत की जीवित धारा के रूप में देखने वाली पुस्तक। यह साधक को मार्गों के भेद से आगे उनके एक ही सत्य-स्रोत की ओर ले जाती है।