ज्ञान · साक्षी
Nirvan Sutra
गुरु की अभिव्यक्ति
- ज्ञान
- साक्षी
- आत्मबोध
- अद्वैत

Nirvan Dham · देवी महामाया की साधना-यात्रा
अनुभवों की तलाश में चल रहे साधकों के लिए देवी महामाया की साधना यात्रा
यह Nirvan Dham का वह जीवंत साधना-क्षेत्र है जहाँ साधक ज्ञान सुनने से आगे बढ़कर ध्यान, मंत्र, शक्ति स्नान और आंतरिक अनुभवों की यात्रा में प्रवेश करते हैं।
दो धाराएँ · एक ही धाम
Nirvan Sutra गुरु की अभिव्यक्ति है। Nirvan Shakti Snan Sadhna देवी महामाया की अभिव्यक्ति है। दोनों विरोधी नहीं, साधक की आंतरिक यात्रा के दो पूरक आयाम हैं।
ज्ञान · साक्षी
गुरु की अभिव्यक्ति
अनुभव · ऊर्जा
देवी महामाया की अभिव्यक्ति
साधक की तैयारी
यह आरंभिक परिचय नहीं, उन साधकों के लिए जीवंत अभ्यास है जो नियमितता के साथ भीतर उतरना चाहते हैं।
01जिन्होंने पहले ध्यान या साधना की है।
02जिन्हें ऊर्जा, स्पंदन, प्रकाश, भाव अथवा मौन की आंतरिक खोज है।
03जो केवल theory नहीं, जीवंत और नियमित साधना चाहते हैं।
04जो मंत्र, देवी-भाव और शक्ति स्नान के प्रति खुले हैं।
05जो प्रतिदिन निश्चित समय पर एक घंटे बैठने के लिए तैयार हैं।
एक समय · एक मंडल · एक घंटा
हर दिन निश्चित समय पर Nirvan Dham के गुरुजनों के सान्निध्य में video call के माध्यम से एक घंटे का ध्यान किया जाएगा।
चरण 1
बाहरी गति से भीतर की स्थिरता की ओर
चरण 2
दीक्षा-मंत्र को श्वास और भाव से जोड़ना
चरण 3
मार्गदर्शित अथवा मौन सामूहिक साधना
चरण 4
जो घटा उसे बिना निर्णय के देखना
चरण 5
स्थिरता, संकल्प और सहज वापसी
पहले समझना, फिर आमंत्रण
आपकी साधना-पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति को समझना।
Nirvan Dham द्वारा उत्तरों का संवेदनशील अध्ययन।
उपयुक्त साधकों को निजी साधना-मंडल में जोड़ना।
साधना-संकल्प और देवी महामाया की यात्रा में प्रवेश।
दीक्षा के समय निजी रूप से साधना-मंत्र दिया जाएगा।
मंत्र, मौन और उपस्थिति में प्रथम सामूहिक शक्ति स्नान।
दैनिक ध्यान और प्रत्येक माह विशेष Shakti Snan।
यात्रा का प्रथम द्वार
यात्रा का आरंभ Aadisatv Deeksha से होगा। दीक्षा में साधक को साधना-संकल्प, मंत्र और देवी महामाया की साधना में प्रवेश दिया जाएगा।
मंत्र केवल दीक्षा के समय निजी रूप से दिया जाएगा; website पर उसे प्रदर्शित नहीं किया जाएगा।
मंत्र · मौन · समर्पण
Shakti Snan वह सामूहिक ध्यान-सत्र है जहाँ साधक मंत्र, मौन, संकल्प और Aadisatv की उपस्थिति में अपने भीतर देवी महामाया के स्पंदन के लिए स्वयं को खोलता है। इसे Shaktipat के एक ध्यानमय रूप में समझा जा सकता है, पर किसी निश्चित अनुभव की गारंटी के रूप में नहीं। कृपा अपने ढंग से घटती है।
छह मास · छह अंतर-द्वार
माह 01
माह 02
माह 03
माह 04
माह 05
माह 06
आपकी वर्तमान साधना को समझने के लिए
यह परीक्षा नहीं है। उत्तर सहज, स्पष्ट और सत्य रखें, ताकि आगे का मार्ग जिम्मेदारी से तय किया जा सके।
साधना की परिपक्वता
यह साधना अनुभवों की खोज से आरंभ हो सकती है, पर अनुभवों की गुलामी पर समाप्त नहीं होती। अनुभव आएँ या न आएँ, साधक की सजगता ही मुख्य है।
Nirvan Dham · निःशुल्क साधना
साधक स्वयं को खोलता है; कृपा अपने ढंग से घटती है।
प्रवेश प्रश्न भरें