by आदिसत्व | Mar 29, 2026 | आदिसत्व
आध्यात्मिक साधना के पथ पर बढ़ते हुए साधक के अंतःकरण में ‘मैं कौन हूँ?’ और ‘अज्ञान का मूल क्या है?’ जैसी जिज्ञासाएँ उठना नितांत स्वाभाविक हैं। सत्संग वह पावन क्षेत्र है जहाँ इन अनुत्तरित प्रश्नों पर व्यवस्थित और सूक्ष्म चिंतन किया जाता है। बहुधा...
by आदिसत्व | Mar 28, 2026 | आदिसत्व
हम जिस संसार में सांस लेते हैं, जिसे अपनी इंद्रियों से स्पर्श करते हैं और अनुभव करते हैं, वह हमें ठोस और ‘सत्य’ प्रतीत होता है। परंतु जब हम उपनिषदों की गहराई में उतरते हैं या ऋषियों की वाणी सुनते हैं, तो वे इस दृश्यमान जगत को ‘माया’ या...
by आदिसत्व | Mar 28, 2026 | आदिसत्व
1. प्रस्तावना: क्या आत्मज्ञान के बाद भी अहंकार बचा रहता है? एक साधक के रूप में, आपको उस विरोधाभास का सामना करना ही होगा जिसे अक्सर ‘ज्ञानी का अहंकार’ कहा जाता है। कई जिज्ञासु यह अनुभव करते हैं कि सत्य की सैद्धांतिक समझ (परोक्ष ज्ञान) होने के बाद भी...
by आदिसत्व | Mar 28, 2026 | आदिसत्व
अध्यात्म की गहराइयों में उतरते ही हमारे सामने दो बड़े शब्द आते हैं: साक्षी भाव (Witnessing) और प्रेम (Love)। ‘मैं कौन हूँ?’ की खोज में निकले हर साधक के लिए ये दो शब्द ध्रुव तारे की तरह हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जिसे हम ‘साक्षी भाव’...
by आदिसत्व | Mar 28, 2026 | आदिसत्व
अक्सर आध्यात्मिक पथ पर चलते हुए हम एक विचित्र विरोधाभास का शिकार हो जाते हैं। हम अज्ञान के अंधेरे से तो बाहर निकल आते हैं, लेकिन अनजाने में ही “मैं मुक्त हूँ” या “मैं ज्ञानी हूँ” के एक नए और सूक्ष्म बोझ के नीचे दब जाते हैं। यह स्थिति वैसी ही है...