ब्रह्म और अद्वैत: क्या ये भी केवल विचार हैं? | विचारहीनता और सत्य का बोध

ब्रह्म और अद्वैत: क्या ये भी केवल विचार हैं? | विचारहीनता और सत्य का बोध

प्रस्तावना: क्या विचारशून्य होना ही वास्तविक बोध है? आध्यात्मिक यात्रा पर निकले एक साधक के अंतर्मन में अक्सर एक गहरी छटपटाहट होती है—सत्य को जानने की, उस परम शांति को पाने की जहाँ मन पूरी तरह शांत हो जाए। इस छटपटाहट के बीच अक्सर एक बड़ी भ्रांति घर कर लेती है: क्या...
सहजावस्था दुर्लभ कैसे है? | सहज का वास्तविक मर्म: एक आध्यात्मिक अन्वेषण

सहजावस्था दुर्लभ कैसे है? | सहज का वास्तविक मर्म: एक आध्यात्मिक अन्वेषण

सहजावस्था का अर्थ है वह स्थिति जो हमारे अस्तित्व का मूल स्वभाव है। किंतु आध्यात्मिक मार्ग पर एक गहरा विरोधाभास सदैव मुमुक्षुओं को चकित करता रहा है—जो ‘सहज’ (Natural) है, वह ‘दुर्लभ’ (Rare) कैसे हो सकता है? यह लेख इसी गहन सत्य की परतों को उघाड़ने...
आत्म-साक्षात्कार: क्या आप उसे देख सकते हैं जो स्वयं देखने वाला है?

आत्म-साक्षात्कार: क्या आप उसे देख सकते हैं जो स्वयं देखने वाला है?

खोजने वाले की खोज आध्यात्मिक यात्रा का सबसे गहरा विरोधाभास यह है कि हम उसे खोजने की चेष्टा कर रहे हैं जो स्वयं हमारी खोज का आधार है। यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति अपनी आँखों से स्वयं अपनी ही आँखों को देखने का हठ करे। हम अक्सर ‘स्वयं को जानने’ की बात करते...
अज्ञान का रहस्य: यदि सब कुछ ब्रह्म है, तो यह अज्ञान का ‘अंधेरा’ कहाँ से आया?

अज्ञान का रहस्य: यदि सब कुछ ब्रह्म है, तो यह अज्ञान का ‘अंधेरा’ कहाँ से आया?

  अद्वैत वेदांत की आधारशिला यह है कि केवल ब्रह्म ही सत्य है—वह पूर्ण, शुद्ध और सर्वज्ञ है। परंतु यहीं एक सूक्ष्म पहेली खड़ी होती है: यदि प्रकाश ही एकमात्र वास्तविकता है, तो अज्ञान की यह छाया कहाँ से आई? यह प्रश्न केवल एक बौद्धिक जिज्ञासा नहीं, बल्कि जैसा कि सत्संग...
अज्ञेता का विस्मय: अवधारणाओं का विसर्जन और सहज बोध

अज्ञेता का विस्मय: अवधारणाओं का विसर्जन और सहज बोध

विस्मय की प्रचंडता अध्यात्म के मार्ग पर ‘विस्मय बोध’ (Sense of Wonder) कोई साधारण आश्चर्य नहीं, बल्कि अस्तित्व को उसकी नग्न और आदिम अवस्था में देखने की एक प्रखर क्षमता है। ज्ञान मार्ग में विस्मय का अर्थ है—दृष्टा और दृश्य के बीच जमी ‘धारणाओं’...

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