by आदिसत्व | Apr 1, 2026 | आदिसत्व
प्रस्तावना: अज्ञान पर प्रहार ‘निर्वाण धाम’ की आध्यात्मिक चेतना में प्रत्येक प्रश्न केवल एक जिज्ञासा नहीं, अपनिहित अज्ञान की गहरी परतों पर एक प्रहार है। अद्वैत वेदांत के मार्ग में मुख्य संशय यह उठता है कि क्या अज्ञान का नाश स्वतः घटित होता है या इसके लिए...
by आदिसत्व | Apr 1, 2026 | आदिसत्व
प्रस्तावना: अस्तित्व का अत्यंत सूक्ष्म अंतर्विरोध आध्यात्मिक जिज्ञासा की देहली पर खड़ा साधक प्रायः एक मौलिक द्वंद्व से संघर्ष करता है: “यदि मेरा वास्तविक स्वरूप पूर्ण मौन है, तो वह कौन है जो संसार के इस अनंत कोलाहल का अनुभव कर रहा है?” यह प्रश्न केवल...
by आदिसत्व | Mar 31, 2026 | आदिसत्व
भूमिका आज के सूचना प्रधान युग में हमारी बुद्धि सूचनाओं के संग्रह को ही ज्ञान मान बैठी है। हम ब्रह्मांड के रहस्यों से लेकर तकनीकी बारीकियों तक सब कुछ जान लेना चाहते हैं, परंतु उस ‘स्वयं’ से अपरिचित रह जाते हैं जो इन समस्त जानकारियों का आधार है। जीवन की इस...
by आदिसत्व | Mar 31, 2026 | आदिसत्व
प्रस्तावना: मर्यादा का संसार और ज्ञानी का अंतर्द्वंद्व सांसारिक जीवन में ‘मर्यादा’ का अर्थ अक्सर व्यवहारिक सीमाओं और उत्तरदायित्वों से लिया जाता है—जैसे पिता, पुत्र या पति के रूप में एक निश्चित आचरण। आध्यात्मिक पथ पर भी साधक के समक्ष एक सूक्ष्म प्रश्न खड़ा...
by आदिसत्व | Mar 31, 2026 | आदिसत्व
‘मैं’ का काव्यात्मक विरोधाभास आध्यात्मिक अन्वेषण की यात्रा में जब हम गहरे उतरते हैं, तो तर्क की सीमाएँ समाप्त होने लगती हैं और अनुभूतियाँ काव्यात्मक होने लगती हैं। “मैं मृत्यु में मरता भी हूँ और अमरता में जीता भी हूँ”—यह कथन कोई बौद्धिक विलास...